काम मे बोझ नहीं रस ढूंढो Motivational Inspirational Story

काम मे बोझ नहीं रस ढूंढो Motivational Inspirational Story in hindi-जीवन के प्रति हमारे नजरिए और हमारी सोच  को बताती यह कहानी एक गावं मे काम कर रहे दो मजदूरों की है आइए इस कहानी को पड़े और कहानी को अपनी जिंदगी मे उतार ले |

Motivational Inspirational Story in hindi: एक गांव में कुछ मजदूर पत्थर तोड़ रहे थे। तभी वहां से एक साधू गुजरे। उन्होंने एक मजदूर से पूछा- यहाँ क्या बन रहा है? मजदूर
बोला- देखते नहीं पत्थर काट रहा हूं। 

काम मे बोझ नहीं रस ढूंढो Motivational Inspirational Story in hindi
Motivational Story
साधु ने कहा- देख तो रहा हूं, लेकिन यहां बनेगा क्या? मजदूर झुंझलाकर बोला- मालूम नहीं… यहां पत्थर तोड़ते-तोड़ते जान निकल रही है और इन्हें यह चिंता है कि यहां क्या बनेगा। साधु आगे बढ़े। वहां दूसरा मजदूर काम में लगा था। साधु ने उससे भी वही पूछा- यहां क्या बनेगा? मजदूर बोला- देखिए साधु बाबा, यहां कुछ भी बने। चाहे मंदिर बने या जेल, मुझे क्या। मुझे तो दिन भर की मजदूरी के 100 रुपए मिलते हैं। बस शाम को रुपए मिलें और मेरा काम बने। मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि यहां क्या बन रहा है। 
 

साधु अब आगे बढ़े और तीसरे मजदूर के पास पहुंचे। साधु ने उससे भी यही पूछा- यहां क्या बनेगा? मजदूर ने कहा- मंदिर…। इस गांव में कोई बड़ा मंदिर नहीं है। गांव के लोगों को तीज-त्योहार पर दूसरे गांव जाना पड़ता है। मैं और ये सारे मजदूर इसी गांव के हैं। मैं एक-एक छेनी चलाकर जब पत्थरों को गढ़ता हूं तो छेनी की आवाज में मुझे मधुर स्वर सुनाई पड़ता है। कुछ दिनों बाद यह मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा, यहां धूमधाम से पूजा होगी। मेला लगेगा। मैं यही सोच कर मस्त रहता हूं। मेरे लिए यह काम, काम नहीं है। मैं हमेशा मस्ती में रहता हूं, मंदिर बनाने की मस्ती में। मैं सोता हूं तो मंदिर की कल्पना के साथ और सुबह जागता हूं तो मंदिर के खंभों को तराशने के लिए निकल पड़ता हूं। बीच-बीच में भजन भी गाता जाता हूं। जीवन में इससे ज्यादा काम करने का आनंद कभी नहीं आया।

साधु सोचने लगे- सचमुच, कितनी विचित्र बात है, कुछ लोग काम को बोझ समझते हैं और दुखी रहते हैं। कुछ लोग काम करते हैं, लेकिन उनका पूरा जीवन झुंझलाते और हाय-हाय करके बीतता है। वहीं कुछ लोग अपने काम में रस लेकर जीने का सही आनंद उठाते हैं। 

यही जीवन के प्रति हमारे नजरिए और हमारी सोच का फर्क है।

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  1. Pushpendra Kumar Singh March 30, 2016

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