जैसे को तैसा Jaise ko Taise Hindi Panchatantra Moral Story

जैसे को तैसा Panchatantra story in hindi

Panchatantra kahani in hindi : विक्रम एक व्यापारी का बेटा था, जिसने अपने व्यापार मे बहुत घाटा खाया। उसने दूसरे देशो में अपनी उन्नती तलाशने की सोची। उसके पास उसके पूर्वजो का लोहे का भारी तराजू था, उसने उसको पास ही के व्यापारी के यहाँ गिरवी रखकर पैसा उधार लिया। उसके बाद उसने कई देशो की यात्रा की और काफी पैसा कमाकर अपने देश लौट आया।

आते ही वह पास के व्यापारी के पास गया और बोला, मित्र मेरा तराजू मुझे वापस कर दो। परंतु उस व्यापारी के मन मे खोट आ गया और उसने कहा, मेरी दुकान में चूहो ने इतना उत्पात मचाया कि वे तुम्हारा तराजू भी खा गए। विक्रम को समझते देर न लगी कि यह झूठ बोल रहा है परंतु उसने बात सभालते हुए बोला, ओह! इसमे तुम भी क्या कर सकते हो जब चूहे ही खा गए। कोई बात नहीं तुम चिंता मत करो। कोई भी चीज हमेशा के लिए नहीं बनी। मैं नदी किनारे नहाने जा रहा हूँ तुम अपने बेटे को मेरे साथ भेज सकते हो ? जब तक मैं नहाऊगा वह चीजों को ध्यान रखेगा। व्यापारी ने हाँ कहते हुए अपने बेटे को आवाज़ लगाई और कहा यह तुम्हारे चाचा है इनके साथ नदी किनारे जाओ कोई इनका समान ना चुरा ले इसका ध्यान रखना। फिर दोनों नदी किनारे चले गए।

नहाने के बाद विक्रम, व्यापारी के बेटे को एक गुफा में ले गया और गुफा को एक बड़ी चट्टान से बंद कर दिया और व्यापारी के पास लौट आया। विक्रम को अकेला आते देख व्यापारी ने पूछा, मेरा बेटा कहाँ है ? तुम्हारा बेटा जो नदी किनारे खड़ा था उसे एक पंक्षी उड़ाकर ले गया। व्यापारी तपाक से बोला – विक्रम तुम झूठ बोल रहे हो, कोई भी पंक्षी इंसान को नहीं उड़ा के ले जा सकता है | मैं तुम्हारी पंचो से शिकायत करूंगा।

व्यापारी विक्रम को पंचो के पास ले गया और बोला कि विक्रम ने मेरे बेटे का अपहरण कर लिया है। पंचो ने विक्रम को व्यापारी के बेटे को सही सलामत वापस लौटने को बोला। तभी विक्रम ने कहा कि इसके बेटे को एक बड़ा पंक्षी उठाकर ले गया है इसमे मैं कुछ नहीं कर सकता। इस बात पर सभी पंचो ने कहा ऐसा कैसे हो सकता ? तभी विक्रम विनम्रता के साथ बोला, अगर कोई चूहा लोहे के तराजू को खा सकता है, तो पंक्षी बच्चे को कैसे नहीं ले जा सकता। इसी के साथ विक्रम ने सारी बात पंचो को बताई और कहा, अगर यह मेरे पूर्वजो का दिया हुआ तराजू लौटा दे, तभी मैं इसका बेटा लौटाऊंगा। जिन लोगो ने भी यह कहानी सुनी सभी हँसने लगे। यह देखकर व्यापारी शर्मसार हुआ, फिर पंचो ने यह फैसला सुनाया कि तुरंत विक्रम को उसका तराजू वापस लाया जाए।

शिक्षा- जैसे को तैसा।

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