मनुष्य Human-Being Quotes Thoughts and Slogans in Hindi

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Human Being Quotes in Hindi

Human Being Quotes

मनुष्य प्रकृति का अनुचर और नियति का दास है। -जयशंकर प्रसाद

मनुष्यों के केवल तीन ही वर्ग हो सकते हैं-विपरीतगामी, स्थिर और अग्रगामी। -लैवेटर

अत्यधिक विरोधी परिस्थितियों में ही मनुष्य की परीक्षा होती है। -महात्मा गाँधी

मनुष्यता का एक पक्ष वह भी है जहाँ वर्ण, धर्म और देश को भूलकर मनुष्य, मनुष्य के लिए प्यार करता है। -जयशंकर प्रसाद

मनुष्य सृष्टिकर्ता के प्रतिबिम्ब में ईश्वरतुल्य कार्य के लिए बनाया गया है। -डीजरायली

यदि एक मनुष्य तनिक भी जानने योग्य है, तो वह पूर्णतः जानने योग्य है। -अलैक्जेंडर स्मिथ

प्रकृति की अनुरूपता नहीं, अपितु संघर्ष ही मानुष को, जो कुछ वह है, बनाता है। -विवेकानंद

आदमी में कितनी भी दुर्बलता हो, बर्बरता भी हो, लेकिन गहराई में उसके देवत्व भी पड़ा हुआ है। -जैनेन्द्र कुमार

मानवता प्रकाश की वह नदी है, जो सीमित से असीम की ओर बहती है। -खलील जिब्रान

मनुष्य एक दृष्टव्य रहस्य है जो दो अनन्तों और दो अपरिमितियों के बीच घूमती है। -कार्लसन

यदि तुम पढ़ना जानते हो तो प्रत्येक मनुष्य स्वयं में पूर्ण एक ग्रंथ है। -चैनिंग

मनुष्य अपने को स्वयं बंधन में डालता है –रवीन्द्रनाथ ठाकुर

यह संसार कार्य-पुरूषों के लिए ही है। पलायन करने का प्रयास मत करो। -स्वामी विवेकानंद

मनुष्य का जीवन ईश्वर की उंगलियों से लिखी गई परिकथा है। -एंडरसन

प्रत्येक मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता है। -सालस्ट

मनुष्य नवजात शिशु के तुल्य, विकास ही उसका बल है। -रवीन्द्रनाथ टैगोर

हर एक मनुष्य जन्म से ही किसी न किसी अद् भुत प्रेम-कला से युक्त होता है। -सरदार पूरणसिंह

बहुत-से मनुष्य इतने अशक्त होते हैं की छोटी-सी बात के लिए क्षमा कर देना उनकी शक्ति से बाहर होता है। -धूमकेतु

मनुष्य को प्रकृति ने ही असमान उत्पन्न किया है, अतः उनसे समानता का व्यवहार करना ही व्यर्थ है। -फ्राउद

कोई मनुष्य 17वीं और 19वीं शताब्दी में एकसाथ नहीं रह सकता। -कार्लाइल

जिनमें दया नहीं, निज भाषा से प्रेम नहीं, चरित्र नहीं, आत्मबल नहीं, वे भी कोई आदमी हैं? –प्रेमचंद

मनुष्य का मापदंड उसकी सम्पदा नहीं, अपितु उसकी बुद्धिमत्ता है। आज वस्तुतः राष्ट्र को ऐसे ही व्यक्तियों की आवश्यकता भी है। -लोकोक्ति

प्रकाश की अति भी मानव-नेत्रों के अंधकार है और प्रकाश का अभाव भी मनुष्य-नेत्रों के लिए अंधकार है। -रामतीर्थ

लोगों को यह जान लेना चाहिए की यंत्र के हिस्सों और पुरजों की तरह वे परस्पर आबद्ध हैं और कोई भी बात या कदम जो एक जाति या राष्ट्र को हानि पहुँचाती हैं, शेष संसार को भी हानि पहुँचाती है। -हेनरी फोर्ड

दुनिया में चार तरह के व्यक्ति हैं-प्रेमी, महत्वाकांक्षी, चिंतक और मूर्ख। मूर्ख सबसे ज्यादा खुद हैं। -टेन

मनुष्य की तीन ही किस्में हैं-पीछे जाने वाले, जहाँ के तहाँ अड़े रहने वाले और आगे बढ़ने वाले। -अज्ञात

मनुष्य का निर्माण जिस खाके या नक्शे पर हुआ है वह ईमानदारी या सत्य का नक्शा है। जो आदमी सच्चे सुख को अपना साथी बनाना चाहता है उसे ईमानदार, सीधा और सच्चा होना पड़ेगा, नहीं तो सुख के पंख उग आएँगे और वह उड़ जाएगा। -स्वेट मार्डन

मनुष्य ठीक उसी परिणाम में महान बनता है जिस परिणाम में वह मानव मात्र के कल्याण के लिए श्रम करता है। -सुकरात

अपने आपको वश में रखने से ही पूर्ण मनुष्यत्व प्राप्त होता है। -हर्बर्ट स्पेन्सर

मनुष्य का बड़ा ढोंगी जीवन है- वह दूसरों को वही सिखाने का उधोग करता है, जिसे स्वयं कभी भी नहीं समझता। -जयशंकर प्रसाद

मनुष्य अपनी श्रेष्ठता को आंतरिक रूप से प्रकट करते हैं, पशु बाह्य रूप से। -रूसी लोकोक्ति

मानव का दानव होना उसकी हर है। मानव का महामानव होना उसका चमत्कार है। -डॉ॰ राधाकृष्ण

अधिकतर मनुष्य जैसे दिखाई देते हैं वैसे नहीं होते। उनके सिद्धान्त दूसरे मनुष्यों की राय होते हैं। उनका जीवन एक लंबी नकल, उनकी आकांक्षाएँ दूसरों के उद्धरण। -अज्ञात

मनुष्य जन्म से स्वतंत्र है, लेकिन वह सब जगह जंजीरों से जकड़ा हुआ है। -रूसो

कोई भी आदमी इतना महत्वहीन नहीं होता कि उसका उदाहरण दूसरों के सामने न रखा जा सके। -लार्ड क्लेरेंडन

जो कुछ हमें होना चाहिए उसकी तुलना में हम केवल अर्धजागृत हैं। हम अपनी शारीरिक तथा मानसिक पूँजी के केवल बहुत थोड़े अंश का ही उपयोग कर सकते हैं खुले सब्दों में कहा जाए तो व्यक्ति अपनी सीमाओं के बहुत भीतर जीवन बिताता है। उसमें विविध प्रकार कि शक्तियाँ हैं, जिसका उपयोग वह नहीं करता। -विलियम जौंस

सही अर्थों में मनुष्य बनने के लिए सबसे पहली और जरूरी चीज है-एक जीवनसाथी का साथ। -अज्ञात

हमारा मनुष्यत्व एक दरिद्र वस्तु होता, अगर उसमें वह देवत्व न होता, जो हमारे अंदर उभरता रहता है। -बेकन

आदमी का मन इस तरह बना हुआ है कि वह शक्ति का प्रतिरोध करता है और कोमलता से झुक जाता है। -अज्ञात

मनुष्य उदार हो तो फरिश्ता है और नीच हो तो शैतान। -प्रेमचंद

व्यक्ति समाज से तिरस्कृत होने पर दार्शनिक, शासन से प्रताड़ित होने पर विद्रोही, परिवार से उपेक्षित होने पर महात्मा और नारी से अनादृत होने पर देवता बनता है। -आचार्य रमण

मानव! अश्रु और मुस्कान के मध्य स्थिर दोलक! –बायरन

जब मनुष्य का युद्ध अपने आप के साथ आरम्भ होता है तब उसका कुछ मूल्य होता है। -ब्राउनिंग

मनुष्य कि मनुष्य के प्रति अमानवता असंख्यों को रूला देती है। -बंर्स

मैं बस इतना ही जानता हूँ कि मनुष्य एक मानवीय अस्तित्व है- मेरे लिए यही पर्याप्त है। -मार्क ट्वेन

मनुष्य कि महिमा को अनुभव करने के लिए ईश्वर कि कोई आवश्यकता नहीं है। ईश्वर कि छाप न मानने पर भी हम मनुष्य के प्रति श्रद्धा प्रकट कर सकते हैं। -प्लैखनोव

हम चमत्कारों के भी चमत्कार हैं और ईश्वर का अगाध रहस्य। -कार्लाइल

मानव के दो रूप हैं-एक वह जो घने अंधकार में भी जागता है और दूसरा वह जो प्रकाश में भी सोता रहता है। -खलील जिब्रान

मनुष्य मात्र ईश्वर का प्रतिनिधि है। -महात्मा गाँधी

प्रत्येक मनुष्य का जीवन ईश्वर कि लेखनी से लिखी गई परिकथा है। -एंडरसन

मनुष्य जब पशु बन जाता है, उस समय वह पशु से भी बदतर होता है। -टैगोर

व्यक्ति कितना विवश है! उसके अपराध भी उसके नहीं हैं। -जैनेन्द्र कुमार

उच्चतम विकास का शिशु मात्र है मनुष्य। -जान ड्रायडन

मनुष्य को पापी कहना ही पाप है, यह कथन मानव समाज पर लांछन है। -स्वामी विवेकानंद

मनुष्यता बड़ी है परंतु मनुष्य छोटा। -बोर्न

मनुष्य पशु नहीं है। बहुत-से पशु जन्मों के अंत में वह मनुष्य बना है। -महात्मा गाँधी

मनुष्य इस संसार में आत्मा, विवेक और बुद्धि लेकर आया है। -अज्ञात

बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना, आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होना। -गालिब

फरिश्ते से बेहतर है इन्सान बनना, मगर इसमें पड़ती है मेहनत जियादा। -हाली

जो भी पुरूष निष्पाप है, निष्कलंक है, निडर है, उसे प्रणाम करो, क्योंकि वह छोटा-मोटा ईश्वर है। -दिनकर

नर के बस की बात,  देवता बने कि नर रह जाये।

रूके गन्ध तक या बढ़कर,   फूलों को गले लगाये।  -दिनकर

मानव जाति का सबसे बड़ा भाग अपने आरम्भिक वर्षों का प्रयोग अपने अंतिम वर्षों को कष्टप्रद बनाने में करता है। -ब्रूयर

सिर्फ आदमी ही रोता हुआ जन्मता है, शिकायतें करता हुआ जीता है और निराश मारता है। -सर वाल्टर टैंपिल

हजार मील लंबी यात्रा भी एक कदम से शुरू होती है। बड़ा मनुष्य उसी की खोज करता है जो स्वयं उसी में वर्तमान है; छोटे मनुष्य उसकी चाहना करते हैं जो दूसरों में हैं। -हितोपदेश

ईमानदार मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्त्म कृति है। -पोप इन्सान जब पशु बन जाता है उस समय वह पशु से बदतर होता है। -रवीन्द्रनाथ ठाकुर

ज्यों-ज्यों मनुष्य बूढ़ा होता है, त्यों-त्यों जीवन से प्रेम और मृत्यु से भय होता जाता है। -जवाहरलाल नेहरू

विश्व बड़ा है, जीवन विश्व से बड़ा है, मनुष्य जीवन से बड़ा है। -अज्ञात

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