Hindi moral story-Kahaniya for child and kids

दो मेढक की कहानी 
एक बार दो मेढक दूध से भरे मटके मे गिर गए| मटके से बाहर आने के लिए वे दूध मे गोल गोल तैरने लगे |  मगर उनके पैरो को कोई ठोस आधार नहीं मिल रहा था| इसलिए कूद कर बाहर आना उनके लिए मुश्किल हो गया | 
 
कुछ देर के बाद एक  मेढक ने दूसरे से कहा, “मै बहुत थक गया हूँ | अब मै और ज्यादा देर नहीं तैर सकता| ” वह हिम्म्त हार गया | उसने मटके से बाहर निकलने की कोशिश छोड़ दी | इसलिए वह मटके के दूध मे डूबकर 
मर गया | 
 
दूसरे मेढक ने सोचा, “मैं अपनी कोशिश नहीं छोड़ूगा| मैं तब तक तैरता रहूँगा, जब तक कोई रास्ता नहीं निकल जाता|” वह तैरता रहा | इस प्रकार उसके लगता तैरते रहने से दूध मथ उठा और उसके ऊपर मक्खन जमा हो
 गया | कुछ देर के बाद मेढक ने मक्खन के गोले पर चढ़कर जोर से छलांग लगायी| इस प्रकार वह मटके के बहार आ गिरा और उसकी जान बच गयी |
 
Moral या सीख –  ईश्वर उसी की मदद करता है, जो स्वयम अपनी मदद करता है | 
 
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  सच्चा मित्र 

 
राम और श्याम अच्छे मित्र थे | एक दिन वे एक जंगल से होकर जा रहे थे |  रास्ते मई उन्हें एक रीछ दिखाई दिया | वह उनकी तरफ ही आ रहा था |  श्याम तुरंत भागकर पास के एक पेड़ पर चढ़ गया | राम को पेड़ पर चढ़ना 
नहीं आता था | पर उसने सुना था की जंगली जानवर मरे हुए लोगो को कुछ नहीं करते | इसलिए वह चुपचाप आँख बंद करके लेट गया और उसने अपनी सांस भी रोक ली  | रीछ राम के पास आया | उसने उसके चेहरे को सुंघा और उसको लगा की वह मर चुका है | इसके बाद रीछ आगे बड़ गया | 
 
जब रीछ  चला गया तो श्याम पेड़ से निचे उतर कर आया और राम से पूछा, “रीछ  ने तुम्हारे कान मे क्या कहा?” राम ने जवाब दिया, “रीछ बोला  की स्वार्थी दोस्तों से दूर रहो | ” 
 
Moral या सीख – समय पर काम आने वाला मित्र ही सच्चा मित्र होता है | 

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गधा और मूर्ति की कहानी
 
एक गॉव मे एक मूर्तिकार रहता था | वह देवी देवताओ की बहुत सुन्दर मूर्ति बनाया करता था | एक बार उसने भगवन की बहुत सुन्दर मूर्ति बनायीं | वह मूर्ति उसको उसके ग्राहक के पास पहुचनी थी इसलिए उसने एक कुम्हार से एक गधा किराये पर लिया | फिर उसने मूर्ति गधा की पीठ पर लादी और चल पड़ा | रस्ते मे जो भी उस मूर्ति को देखता, पल भर रुककर मूर्ति की तारीफ जरूर करता | कुछ लोग मूर्ति को देखेते ही झुक कर प्रणाम करते | 
 
यह देखकर उस मुर्ख गधे ने सोचा की लोग उसी की तारीफ कर रहे है और उसी को हाथ जोड़ कर प्रणाम कर रहे है | वह अकड़कर सड़क के बीच खड़ा हो गया और जोर जोर से रेंकने लगा | मूर्तिकार ने गधे को पुचकार कर चुप करने की कोशिश की लकिन गधा नहीं मना | अंत मे उस मूर्तिकार ने डंडे से उसकी खूब पिटाई की | मार खाने के बाद गधे का सारा घमंड उतर गया | उसका होश ठिकाने आया और वह फिर चुपचाप चलने लगा | 
 
Moral या सीख – समझदार के लिए इशारा और मूर्खो के लिए डंडा | 

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लकड़हारा और देवदूत  

एक लकड़हारा था | एक बार वह नदी के किनारे एक पेड़ से लकड़ी काट रहा था | एकाएक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूटकर नदी मे गिर पड़ी | नदी गहरी थी | उसका प्रवाह भी तेज था | लकड़हारे ने नदी से कुल्हाड़ी निकलने की बहतु कोशिश की, पर वह उसे नहीं मिली | इससे लकड़हारा बहुत दुखी हो गया| इतने मे एक देवदूत वहाँ से गुजरा | लकड़हारे को मुहँ लटकाए खड़ा देखकर उसे दया आ गयी| वह लकड़हारे के पास आया और बोला, “चिंता मत करो | मैं नदी में से तुम्हारी कुल्हाड़ी अभी निकल देता हूँ |” यह कहकर  देवदूत नदी मे कूद पड़ा | 
 
देवदूत पानी से बाहर निकला तो उसके हाथ मे एक सोने की कुल्हाड़ी थी | वह लकड़हारे को सोने की कुल्हाड़ी देने लगा, तो लकड़हारे ने कहा, “नहीं नहीं, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है | मे इसे नहीं ले सकता |” 
 
देवदूत ने फिर नदी मे डुबकी लगायी | इस बार वह चांदी की कुल्हाड़ी लेकर बहार आया | ईमानदार लकड़हारे ने कहा, “यह कुल्हाड़ी भी मेरी नहीं है |” 
 
देवदूत ने तीसरी बार नदी मे डुबकी लगायी | इस बार वह एक साधारण से लोहे की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया | 
 
“हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है, “लकड़हारे ने खुश होकर कहा | 
 
उस गरीब की ईमानदारी देखकर देवदूत बहुत खुश हुआ | उसने लकड़हारे को उसकी  लोहे के कुल्हाड़ी दे दी | साथ ही उसने सोने एवं चांदी की कुल्हाड़ियाँ भी उसे पुरस्कार के रूप मे दे दी | 
Moral of Story – ईमानदारी से बढ़कर कोई चीज नहीं | हमे अपने जीवन मे कठिन से कठिन समय मे भी ईमानदारी को नहीं छोड़ना चाहिए | 

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Hindi Moral Story for kids – बादाम किसे मिला 
एक दिन दो लड़के सड़क के किनार- किनारे जा रहे थे | तभी उन्हें जमीन पर गिरा हुआ एक बादाम दिखाई दिया | दोनों उस बादाम को लेने के लिए दौड़ पड़े | बादाम उनमे से एक लड़के के हाथ लगा| दूसरे लड़के ने कहा, “यह बादाम मेरा है, क्योकि सबसे पहले मैंने ही इसे देखा था | “
 
“यह मेरा है”, बादाम लेने वाले लड़के ने कहा, “क्योकि सबसे पहले मैंने इसे उठाया है |”
 
इतने मे एक चालाक और लम्बा सा लड़का वहां आ पंहुचा | उसने दोनों लड़को से कहा, “बादाम मुझे दो | मै तुम लोगो का झगड़ा निपटा देता हूँ | “
 
लम्बे लड़के ने बादाम ले लिया| उसने बादाम को फोड़ कर और छिलके के दो टुकड़े कर दिए| छिलके का आधा हिस्सा एक लड़के को देकर उसने कहा, “लो यह आधा भाग तुम्हारा और दूसरे लड़के को छिलके का आधा भाग दे दिया | 
 
फिर लम्बे लड़के ने बादाम की गिरी अपने मुहँ मे डालते हुए कहा, “यह बाकी हिस्सा मै खा लेता हूँ | क्योकि तुम्हारा झगड़ा निपटाने मे मैंने मदद की है | ” 
 
Story Moral – दोस्तों को आपस मे झगङा नहीं करना चाहिए क्योकि दो के झगडे मे तीसरे का फायदा होता है | 

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Hindi Moral Story for children-  भेड़ चराने वाला लड़का और भेड़िया 

एक भेड़ चराने वाला लड़का था | वह रोज भेड़ो को चराने के लिए जंगल मे ले जाता था| जंगल मे वह अकेला होता था|  इसलिए उसका मन नहीं लगता था | एक दिन उसे मजाक करने की सूझी | वह जोर जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ-बचाओ ! भेड़िया आया, भेड़िया आया!”

आसपास के खेतो मे किसान काम कर रहे थे | उन्होंने लड़के की आवाज सुनी| वे अपना अपना काम छोड़कर लड़के की मदद के लिए दौड़े| जब वे लड़के के पास पहुंचे तो उन्हें कही भेड़िया दिखाई नहीं दिया| 
लोगो ने लड़के से पूछा, “भेड़िया तो कही दिखाई नहीं दे रहा तो तुमने हमको क्यों बुलाया?”

लड़का हँसने लगा और बोला “मैं तो मजाक कर रहा था| कोई भेड़िया नहीं आया| जाओ आप लोग अपना काम करो|” 

लोगो ने उस लड़के को खूब डाटा और लौट गए | 

इसके बाद लड़के ने कई बार इस तरह का मजाक किया और आस पास के लोगो को पेरशान किया | 

कुछ समय बाद एक दिन सचमुच भेड़िया आ पंहुचा| भेड़ चराने वाला लड़का पेड़ पर चढ़ गया और चिल्लाने लगा, “बचाओ बचाओ भेड़िया आया”| पर इस बार लोगो ने सोचा की लड़का झूठ बोल रहा है और उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया | भेड़िया ने लड़के की कई भेड़ो को मार डाला | इससे लड़के को अपने गलती का एहसास हुआ और उसने सोचा हमे कभी भी झूठ नहीं बोलना चाइये | 

Moral of the Story – झूठे आदमी की सच्ची बातो पर भी लोग विश्वास नहीं करते इसलिए कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए |